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निर्वाण कांड भाषा | Nirwankand Bhasha

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श्री भक्तामर चालीसा | Shri Bhaktamar Chalisa

  || श्री भक्तामर चालीसा || भक्तामर भक्ति भरा , मानतुंग का रूप , आदिनाथ को है नमन भक्ति भाव स्वरूप। भक्तामर के पठन से , सर्व शांति होय , संकट बाधा दूर हो , मन भी निर्मल होय।। आदिनाथ को मन में धरके , कष्ट मिटेंगे सारे जग के। संकट हारी नाम है इसका , पुण्य मिले भारी जिसका।। भक्ति रस का भरा है किस्सा भव्य जनों ने लिया है हिस्सा। मानतुंग की ऐसी रचना , सारी जग की करती रचना।। काव्य करिश्मा देखा इसका , घर में पाठ कराओ इसका। ईसा की सदी ग्यारहवीं थी , उज्जैनी वह पुण्यपुरी थी।। मालवा प्रांत बड़ा ही सुंदर , विद्वानों का ज्ञान समुंदर। राजा भोज ही शासन करते , कालिदास जी मंत्री रहते।। एक दिन सेठ सुदत्त भी जाकर , नृप को नमता राज्य में आकर। उसका पुत्र मनोहर प्यारा , राज्य सभा में सबसे न्यारा।। राजा भोज ने प्रतिभा देखी , मनोहर की बुद्धि को लेखी। नाममाला की बात चलायी , कवि धनंजय कृति बतायी।। पर्यायवाची नाम बताएये , शब्दों का भंडार दिखाये। राजा भो...

भगवान श्री नेमिनाथ चालीसा | Bhagwan Shri Neminath Chalisa

  ।।श्री नेमिनाथ चालीसा।। श्री जिनवाणी शीश धार कर , सिध्द प्रभु का करके ध्यान । लिखू नेमि - चालीसा सुखकार , नेमिप्रभु की शरण में आन । समुद्र विजय यादव कुलराई , शौरीपुर राजधानी कहाई । शिवादेवी उनकी महारानी , षष्ठी कार्तिक शुक्ल बरवानी । सुख से शयन करें शय्या पर , सपने देखें सोलह सुन्दर । तज विमान जयन्त अवतारे , हुए मनोरथ पूरण सारे । प्रतिदिन महल में रतन बरसते , यदुवंशी निज मन में हरषते । दिन षष्ठी श्रावण शुक्ला का , हुआ अभ्युदय पुत्र रतन का । तीन लोक में आनन्द छाया , प्रभु को मेरू पर पधराया । न्हवन हेतु जल ले क्षीरसागर , मणियों के थे कलश मनोहर । कर अभिषेक किया परणाम , अरिष्ट नेमि दिया शुभ नाम । शोभित तुमसे सत्य - मराल , जीता तुमने काल – कराल । सहस अष्ट लक्षण सुललाम , नीलकमल सम वर्ण अभिराम । वज्र शरीर दस धनुष उतंग , लज्जित तुम छवि देव अनंग । चाचा - ताऊ रहते साथ , नेमि - कूष्ण चचेरे भ्रात । धरा जब यौवन जिनराई , राजुल के संग हुई सगाई । जूनागड़ ...