धन तेरस का जैन धर्म में महत्व
धन तेरस का जैन धर्म में कोई उल्लेख नहीं पाया गया धन्य तेरस या ध्यान तेरस के नाम से पाया गया है भगवान महावीर स्वामी अपने तीस वर्ष तक लगभग अपना उपदेश देते देते तीर्थंकर प्रकर्ति की उदीरणा रुक गई तो भगवान महावीर स्वामी ने धन्य तेरस के दिन समवसरण का त्याग कर दिया और समवसरण का त्याग करके पावापुरी के उद्यान में जाकर स्थित हो गए तो उस तिथि का नाम धन्य (ध्यान) तेरस हुआ क्योंकि भगवान ने सारे संसार के बन्धनों से छूटने का प्रयास चालू किया क्योंकि भगवान अभी तक समवसरण छोड़ते थे तो दूसरी जगह लगता था तो अब आखिरी समवसरण था तो कुबेर देव ने खूब रत्न वृश्टि की तो लोग जब अपने घर समवसरण से लोटे तो वह रत्न लेकर लोटे तो इस कारण से यह धन तेरस के नाम प्रचलित हो गया।
तो इसलिए धन तेरस के दिन यदि कुछ खरीदना है तो रत्न , सोना - चांदी , पीतल या तांबे के बर्तन खरीद सकते है लेकिन स्टील के बर्तन खरीदने से बचना चाहिए |

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